जली हुई या ख़ाली मोटर का नया वाइंडिंग डेटा निकालने का तरीका और फॉर्मूला

Motor Winding Data Calculation Formula

ख़ाली मोटर का नया डेटा कैसे निकालें !

या फिर कई लोग पूछते हैं—“बड़ी-बड़ी कंपनियों में जो डिज़ाइनर इंजीनियर बैठते हैं, वो जब कोई नई मोटर बनाते हैं तो बिना किसी पुरानी वाइंडिंग के उसका टर्न, तार का गेज (Wire Gauge) और कनेक्शन कैसे तय करते हैं?”

Motor Winding Data Calculation
मोटर का ओरिजिनल वाइंडिंग डेटा खुद से कैलकुलेट करने का आसान गाइड।

आज का यह ब्लॉग इसी समस्या का पूरा और पक्का समाधान है। आज मैं आपको वह सीक्रेट फॉर्मूला और तरीका बताने जा रहा हूँ, जिसका इस्तेमाल बड़ी-बड़ी मोटर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के इंजीनियर्स करते हैं। इस ब्लॉग को पूरा पढ़ने के बाद आपको किसी से भी Motor Winding Data मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप खुद अपनी वर्कशॉप पर बैठकर किसी भी सीलिंग फैन, कूलर, सिंगल-फेस मोटर, या बड़ी से बड़ी 50 HP/60 HP थ्री-फेस मोटर का ओरिजिनल वाइंडिंग डेटा खुद कैलकुलेट कर लेंगे।

तो चलिए, बिना समय गंवाए एकदम प्रैक्टिकल तरीके से शुरू करते हैं!


1. मोटर डिज़ाइनिंग के बुनियादी नियम (The Core Physics)

इससे पहले कि हम गणित और फॉर्मूलों के अंदर घुसें, हमें यह समझना होगा कि मोटर के अंदर बिजली और चुंबक (Magnetism) काम कैसे करते हैं। जब तक आपको इसका मूल सिद्धांत समझ नहीं आएगा, तब तक फॉर्मूले रटने का कोई फायदा नहीं होगा।

कोर (Core) और स्लॉट (Slots) का महत्व

मोटर का जो स्टेटर (Stator) होता है, वह सिलिकॉन स्टील की पतली-पतली पत्तियों (Laminations) को आपस में जोड़कर बनाया जाता है। पत्तियों का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है ताकि मोटर के अंदर Eddy Current Losses (बिजली का फालतू नुकसान और हीटिंग) कम से कम हो।

मोटर स्टेटर कोर की लंबाई L और अंदरूनी व्यास D का माप
स्टेटर की कोर लंबाई (L) और inner diameter (D) को सही तरीके से मापना।
  • स्टेटर कोर की लंबाई (Core Length / Inner Depth): इसे हम L से दर्शाते हैं।
  • स्टेटर का अंदरूनी व्यास (Inner Diameter – ID): स्टेटर के अंदर खाली गोलाई का जो व्यास होता है, उसे D कहते हैं।
  • स्लॉट (Slots): स्टेटर के अंदर जिन खांचों में हम कॉइल डालते हैं, उन्हें स्लॉट कहते हैं। आमतौर पर मोटर्स 24, 36 या 48 स्लॉट्स की होती हैं।

कंपनी का इंजीनियर जब भी कोई नई मोटर डिज़ाइन करता है, तो वह सबसे पहले इसी स्टेटर की लंबाई (L) और अंदरूनी व्यास (D) को मापता है। पूरी मोटर की ताकत, उसके टर्न्स और तार का गेज इसी साइज पर निर्भर करता है।


2. मोटर का आरपीएम (RPM) और पोल (Poles) कैलकुलेशन (Motor Winding Data)

मोटर का डेटा निकालने का सबसे पहला कदम यह तय करना है कि मोटर कितने आरपीएम (Rotations Per Minute) पर घूमेगी। आरपीएम तय होते ही हमें पता चल जाता है कि मोटर के अंदर कितने पूल (Poles) की वाइंडिंग होगी।

2 Pole और 4 Pole मोटर में मैग्नेटिक फील्ड और RPM अंतर
मोटर के पोल (Poles) और आरपीएम (RPM) के बीच का कनेक्शन।

इसके लिए दुनिया का सबसे मशहूर फॉर्मूला इस्तेमाल किया जाता है:

Ns = 120 × fP

जहाँ:

  • Ns = मोटर की सिंक्रोनस स्पीड (RPM में)
  • f = फ्रीक्वेंसी (भारत में यह हमेशा 50 Hz होती है)
  • P = मोटर के पोल की संख्या (नंबर ऑफ पोल्स)

पोल निकालने का सीधा फॉर्मूला:

यदि आपको मोटर का आरपीएम पता है और पोल निकालने हैं, तो फॉर्मूला इस प्रकार बदल जाएगा:

P = 120 × fNs
💡 प्रैक्टिकल उदाहरण:

मान लीजिए हमारे पास एक मोटर है जिसे हमें 1500 RPM (लगभग 1440 RPM एक्चुअल) पर चलाना है। तो उसके पोल्स की संख्या क्या होगी?

P = 120 × 501500 = 60001500 = 4 Poles
⚡ शॉर्टकट चार्ट (50Hz फ्रीक्वेंसी के लिए):
2 पोल की मोटर: ≈ 2800 – 3000 RPM (हाई स्पीड कूलर, पानी का पंप, कटर मशीन)
4 पोल की मोटर: ≈ 1400 – 1500 RPM (आम घरेलू मोटर्स, चक्की मोटर, कमर्शियल पंप)
6 पोल की मोटर: ≈ 900 – 1000 RPM (बड़े एग्जॉस्ट फैन, भारी मशीनें)
8 पोल की मोटर: ≈ 700 – 750 RPM (बहुत धीमी गति और ज्यादा टॉर्क वाली मशीनें)

3. वाइंडिंग पिच (Winding Pitch) और स्लॉट कैलकुलेशन (Motor Winding Data)

पोल तय होने के बाद हमें यह निकालना होता है कि हमारी कॉइल स्टेटर के कौन से स्लॉट से निकलकर कौन से स्लॉट में जाएगी। इसे कॉइल पिच (Coil Pitch) कहते हैं।

24 स्लॉट मोटर में 1 से 6 वाइंडिंग पिच और कॉइल लेआउट
24 स्लॉट मोटर में 1 से 6 (1 to 6) कॉइल पिच बैठाने की विधि।

पोल पिच (Pole Pitch) का फॉर्मूला:

Pole Pitch = Total SlotsTotal Poles
💡 उदाहरण:

यदि हमारे पास 24 स्लॉट का स्टेटर है और हमें उसे 4 पोल में वाइंड करना है, तो पोल पिच क्या होगी?

Pole Pitch = 244 = 6

इसका मतलब है कि हमारी एक कॉइल का फैलाव 6 स्लॉट्स के बराबर होगा। प्रैक्टिकल वाइंडिंग में इसे 1 से 6 पिच (1 to 6 Pitch) कहा जाता है। यानी कॉइल पहले स्लॉट में डलेगी, बीच में 4 स्लॉट खाली छूटेंगे, और फिर छठे स्लॉट में डलेगी।


4. फ्लक्स पर पोल (Flux Per Pole) की गणना—इंजीनियर का मुख्य फॉर्मूला

कंपनी के इंजीनियर्स सीधे टर्न्स का अंदाजा नहीं लगाते। वे सबसे पहले यह देखते हैं कि स्टेटर के लोहे (Core) की क्षमता कितनी है और वह कितना चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Flux) झेल सकता है।

अगर हम क्षमता से ज्यादा फ्लक्स पैदा कर देंगे, तो लोहा गर्म होकर लाल हो जाएगा और मोटर जल जाएगी (इस स्थिति को Magnetic Saturation कहते हैं)।

सिलिकॉन स्टील स्टेटर कोर में मैग्नेटिक फ्लक्स डेंसिटी Bmax
टर कोर में मैग्नेटिक फ्लक्स डेंसिटी Bmax का फ्लो।

चुंबकीय क्षेत्र (Flux – φ) निकालने का फॉर्मूला:

ϕ = Bmax × Ai

जहाँ:

  • ϕ = मैग्नेटिक फ्लक्स (Webers में)
  • Bmax = फ्लक्स डेंसिटी (Flux Density)। साधारण सिलिकॉन स्टील कोर के लिए कंपनियों में इसे 0.6 से 0.85 Tesla के बीच माना जाता है। अच्छी क्वालिटी के कोर के लिए आप इसे 0.75 Tesla ले सकते हैं।
  • Ai = कोर का शुद्ध चुंबकीय एरिया (Net Iron Area)
नेट आयरन एरिया (Ai) निकालने का फॉर्मूला:
Ai = L × D × 0.9

नोट: यहाँ 0.9 इसलिए लगाया जाता है क्योंकि पत्तियों के बीच में इंसुलेशन वार्निश की पतली परत होती है, जिससे 10% जगह कम हो जाती है। L और D को मीटर (Meter) में मापना है।


5. मोटर के प्रति फेज टर्न्स (Turns Per Phase) की गणना (Motor Winding Data)

मोटर वाइंडिंग टर्न्स निकालने का EMF फॉर्मूला
मोटर के प्रति फेज टर्न्स (Turns Per Phase) की गणना का मुख्य फॉर्मूला।
अब आता है सबसे जरूरी फॉर्मूला जिसके जरिए हम मोटर के कॉइल के टर्न्स (Number of Turns) निकालते हैं। इसे EMF Equationकहा जाता है:
V = 4.44 × f × ϕ × Tph × Kw

इस फॉर्मूले को जब हम टर्न्स निकालने के लिए घुमाते हैं, तो यह ऐसा बनता है:

Tph = V4.44 × f × ϕ × Kw

जहाँ:

  • V = प्रति फेज वोल्टेज (Single Phase के लिए 230V, Three Phase के लिए 415 / √3 = 240V)
  • f = फ्रीक्वency (50 Hz)
  • ϕ = फ्लक्स पर पोल (जो हमने स्टेप 4 में निकाला)
  • Kw = वाइंडिंग फैक्टर (Winding Factor)। आम तौर पर थ्री-फेस डिस्ट्रीब्यूटेड वाइंडिंग के लिए इसका मान 0.955 लिया जाता है।
💡 स्टेप-बाय-स्टेप प्रैक्टिकल कैलकुलेशन उदाहरण:

मान लीजिए हमारे पास एक 3-Phase मोटर का स्टेटर है जिसके माप निम्नलिखित हैं:

  • कोर की लंबाई (L) = 0.1 meter (10 cm)
  • अंदरूनी व्यास (D) = 0.12 meter (12 cm)
  • पोल्स (P) = 4
  • वोल्टेज (Vph) = 240V
स्टेप ए: नेट आयरन एरिया (Ai)
Ai = 0.1 × 0.12 × 0.9 = 0.0108 m²
स्टेप बी: एरिया पर पोल (Ap)
Ap = π × D × LP = 3.14 × 0.12 × 0.14 = 0.00942 m²
स्टेप सी: टोटल फ्लक्स (ϕ)
यदि हम Bmax = 0.75 Tesla लेते हैं:
ϕ = 0.75 × 0.00942 = 0.007065 Webers
स्टेप डी: टर्न्स पर फेज (Tph)
Tph = 2404.44 × 50 × 0.007065 × 0.955 = 2401.498160 Turns (Per Phase)
⚙️ प्रति कॉइल टर्न्स (Turns Per Coil) कैसे निकालें?

यदि हमारे पास 24 स्लॉट की मोटर है और यह 3 फेज की है:

  • टोटल कॉइल्स = 12 (Single layer वाइंडिंग मानने पर)
  • हर फेज के हिस्से में आई कॉइल्स = 12 / 3 = 4 कॉइल्स
  • एक कॉइल के टर्न्स = Turns Per PhaseCoils Per Phase = 1604 = 40 Turns

देखा आपने? इस तरह कंपनी के इंजीनियर्स बिना किसी पुराने डेटा के एकदम सटीक टर्न्स निकाल लेते हैं।



6. तार का गेज (Wire Gauge / SWG) और करंट कैपेसिटी का फॉर्मूला

टर्न्स निकालने के बाद दूसरा सबसे बड़ा काम होता है सही तार का चुनाव करना। अगर तार बहुत पतला रख दिया, तो करंट के दबाव से तार गर्म होकर जल जाएगा। अगर तार बहुत मोटा रख दिया, तो वह स्लॉट के अंदर समाएगा ही नहीं (Slot Overflow हो जाएगा)।

तार का गेज हमेशा मोटर के करंट (Ampere) पर निर्भर करता है।

Standard Wire Gauge SWG प्लेट से कॉपर वायर का नंबर मापना
SWG गेज प्लेट से वाइंडिंग वायर की मोटाई (गेज नंबर) मापना।
तार का गेज और व्यास सटीक नापने के लिए आप Standard Wire Gauge (SWG) Standard Table का संदर्भ ले सकते हैं।

मोटर का करंट (Amperes) निकालने का फॉर्मूला:

1-Phase मोटर के लिए:

I = HP × 746V × Efficiency × Power Factor

3-Phase मोटर के लिए:

I = HP × 746√3 × V × Efficiency × Power Factor

(आम तौर पर साधारण मोटर्स के लिए Efficiency को 0.80 और Power Factor को 0.82 माना जाता है।)

करंट डेंसिटी (Current Density – J):

कॉपर के तारों के लिए कंपनियों में करंट डेंसिटी 4 से 6 A/mm² (Amperes per square millimeter) के बीच रखी जाती है। लगातार चलने वाली हैवी ड्यूटी मोटर्स के लिए हम सुरक्षित मान 5 A/mm² लेकर चलते हैं।

तार का क्रॉस-सेक्शनल एरिया (Wire Area – Aw) निकालना:
Aw = Full Load Current (I)Current Density (J)
💡 उदाहरण:

यदि हमारी मोटर का करंट 5 Ampere आ रहा है:

Aw = 55 = 1 mm²

अब हमें स्टैंडर्ड वायर गेज (SWG) के चार्ट में देखना होगा कि 1 mm² एरिया किस नंबर के तार का होता है। नीचे दिए गए प्रैक्टिकल चार्ट से आप सीधे तार का नंबर चुन सकते हैं:

⚡ कॉपर वायर करंट कैपेसिटी चार्ट (SWG Chart):
SWG नंबर तार का व्यास (mm) क्रॉस सेक्शन एरिया (mm²) सुरक्षित करंट क्षमता (Amps)
18 SWG1.2191.1675.8A
19 SWG1.0160.8104.0A
20 SWG0.9140.6563.2A
21 SWG0.8130.5182.5A
22 SWG0.7110.3972.0A
23 SWG0.6100.2921.4A
24 SWG0.5590.2451.2A
25 SWG0.5080.2021.0A

नोट: अगर आपको 5 Ampere करंट के लिए तार चाहिए, तो आप या तो अकेले 18 SWG का इस्तेमाल कर सकते हैं, या फिर 21 SWG के दो तारों को एक साथ मिलाकर (Double Wire) वाइंडिंग कर सकते हैं। डबल तार से वाइंडिंग करना आसान होता है क्योंकि मोटा तार आसानी से स्लॉट में मुड़ता नहीं है।

कॉपर वायर की रेजिस्टविटी और इलेक्ट्रिकल प्रॉपर्टीज की अधिक जानकारी के लिए Engineering ToolBox Wire Specifications पर विवरण देख सकते हैं।

7. स्लॉट स्पेस फैक्टर (Slot Space Factor) — सबसे जरूरी प्रैक्टिकल चेक

डेटा निकालने के बाद हर इंजीनियर एक फाइनल चेक जरूर करता है जिसे Slot Space Factor कहते हैं। इसका मतलब यह है कि जो तार और टर्न्स हमने चुने हैं, क्या वो सारे के सारे स्लॉट के अंदर सुरक्षित आ जाएंगे या स्लॉट छोटा पड़ जाएगा?

मोटर स्लॉट में 45% कॉपर वायर और खाली जगह का अनुपात
स्लॉट स्पेस फैक्टर (Slot Space Factor) — 45% कॉपर वायर का नियम।

स्लॉट स्पेस फैक्टर (Slot Space Factor) का नियम:

किसी भी मोटर के स्लॉट का केवल 40% से 45% हिस्सा ही कॉपर वायर से भरना चाहिए। बाकी का 55% हिस्सा खाली रहना चाहिए जिसमें स्लॉट पेपर (PVC Sheet), कॉइल के बीच का इंसुलेशन और वार्निश अच्छी तरह समा सके।

Slot Space Factor = Total Area of All Wires in a SlotTotal Area of the Bare Slot ≤ 0.45

ध्यान दें: अगर यह कैलकुलेशन 0.45 (45%) से ज्यादा आ रही है, तो इसका मतलब है कि वाइंडिंग करते समय तार स्लॉट से बाहर भागेंगे। ऐसी स्थिति में हमें या तो टर्न्स थोड़े कम करने पड़ते हैं या फिर तार का गेज एक नंबर पतला करना पड़ता है।


💡 यह भी ज़रूर पढ़ें: AC Generator (Alternator) क्या है? (Complete Engineering Guide)

8. थ्री-फेज मोटर के कनेक्शन: स्टार (Star) बनाम डेल्टा (Delta)

⚠️ डेटा सही निकालने के बाद भी अगर आपने कनेक्शन में गलती कर दी, तो मोटर ऑन करते ही जल जाएगी या फिर पूरा लोड नहीं उठाएगी।

⭐ 1. स्टार कनेक्शन (Star Connection – Y):

  • इसमें हम कॉइल के आखिरी तीनों सिरों (U₂, V₂, W₂) को आपस में शॉर्ट (जोड़) कर देते हैं और बचे हुए तीन सिरों पर R, Y, B सप्लाई देते हैं।
  • इंजीनियर का नियम: स्टार कनेक्शन में हर कॉइल को सिर्फ 230V मिलता है। इसलिए कम लोड या 5 HP से छोटी मोटर्स को स्टार में चलाया जाता है ताकि वे सुचारू रूप से चलें।
थ्री फेज मोटर का स्टार टर्मिनल कनेक्शन डायग्राम

चित्र: 3-फेज इंडक्शन मोटर का Star (Y) कनेक्शन समझें।

🔺 2. डेल्टा कनेक्शन (Delta Connection – Δ):

  • इसमें पहले फेज का आखिरी सिरा दूसरे फेज के पहले सिरे से जुड़ता है: (U₂ से V₁, V₂ से W₁, W₂ से U₁)
  • इंजीनियर का नियम: डेल्टा कनेक्शन में हर कॉइल को पूरा 415V मिलता है। इसलिए भारी लोड खींचने वाली और 7.5 HP से बड़ी मोटर्स को हमेशा डेल्टा में चलाया जाता है ताकि मोटर पूरी ताकत (Torque) पैदा कर सके।
थ्री फेज मोटर का डेल्टा टर्मिनल कनेक्शन डायग्राम

चित्र: 3-फेज इंडक्शन मोटर का Delta (Δ) कनेक्शन समझें।



9. मेराज भाई के स्पेशल प्रैक्टिकल टिप्स (Meraj Engineer Pro-Tips)

किताबी फॉर्मूले अपनी जगह बिल्कुल सही हैं, लेकिन जब हम वर्कशॉप पर ऑन-फील्ड काम करते हैं, तो हमें कुछ देसी और प्रैक्टिकल जुगाड़ भी पता होने चाहिए:

मेराज इंजीनियर वर्कशॉप पर मोटर वाइंडिंग के प्रैक्टिकल टिप्स
मेराज भाई के स्पेशल टिप्स — माइक्रोमीटर से तार का सही नंबर मापना।

🛠️ मेराज भाई के स्पेशल प्रैक्टिकल टिप्स (Pro-Tips):

  1. पुराने तार का वजन हमेशा करें: अगर मोटर जली हुई आई है, तो उसे काटने से पहले उसका वजन जरूर कर लें। नया डेटा निकालने के बाद जब आप कॉइल बनाएं, तो नए कॉपर वायर का कुल वजन पुराने वजन के लगभग बराबर (5% ऊपर-नीचे) होना चाहिए। इससे आपको तसल्ली हो जाएगी कि आपका डेटा एकदम परफेक्ट है।
  2. माइक्रोमीटर का इस्तेमाल: कभी भी तार का गेज केवल आंख से देखकर या अंदाजे से न तय करें। हमेशा Digital Micrometer / Screw Gauge का इस्तेमाल करें और तार का इनेमल (ऊपर की कोटिंग) जलाकर साफ करने के बाद ही उसकी मोटाई नापें।
  3. वार्निश की क्वालिटी: वाइंडिंग कितनी भी अच्छी हो, अगर आपने घटिया क्वालिटी का वार्निश इस्तेमाल किया तो मोटर की लाइफ आधी हो जाएगी। हमेशा डॉ. बेक (Dr. Beck) या अच्छी कंपनी का ओरिजिनल वार्निश इस्तेमाल करें और मोटर को पूरी तरह सुखाने के बाद ही चलाएं।
मोटर वाइंडिंग और इंसुलेशन की सेफ्टी के लिए अंतर्राष्ट्रीय IEEE Electrical Insulation Standards के नियमों का पालन किया जाता है।

तो दोस्तों, यह था पूरा गणित और प्रैक्टिकल तरीका जिसके जरिए फैक्ट्रियों और कंपनियों में किसी भी मोटर का नया वाइंडिंग डेटा डिज़ाइन किया जाता है। शुरू-शुरू में हो सकता है कि आपको ये फॉर्मूले थोड़े मुश्किल लगें, लेकिन जब आप दो-चार मोटर्स पर खुद इंच टेप और वर्नियर कैलिपर लेकर नाप लेंगे, तो आप भी इसमें एकदम “Perfect” हो जाएंगे।

अगर आपको यह जानकारी मददगार लगी हो, तो इस ब्लॉग को अपने इलेक्ट्रिशियन भाइयों और दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।

⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer):

इस ब्लॉग में दी गई सभी जानकारियाँ और फॉर्मूले विश्वसनीय व प्रामाणिक स्रोतों (Standard Electrical Engineering Principles) से लिए गए हैं और इनकी सटीकता का पूरा ध्यान रखा गया है। ब्लॉग में इस्तेमाल की गई सभी इमेजेस काल्पनिक (Illustrative) हैं, वास्तविक इमेज या मोटर का लेआउट इससे भिन्न हो सकता है। मोटर की स्थिति, कोर की क्वालिटी और प्रैक्टिकल वाइंडिंग परिस्थितियों के आधार पर परिणाम अलग हो सकते हैं। इसलिए, किसी भी मोटर पर डेटा लागू करने या वाइंडिंग शुरू करने से पहले अपने स्तर पर उसकी अच्छी तरह जाँच व गणना अवश्य कर लें। किसी भी प्रकार के नुकसान, दुर्घटना या गलती के लिए यह वेबसाइट या लेखक (Author) जिम्मेदार नहीं होंगे।

जय हिंद, जय भारत!

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